Brain Power के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाई दवाएँ और दिमाग तेज करने के सप्लीमेंट्स

Brain Power के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाई दवाएँ: मेमोरी, फोकस और दिमाग तेज करने के अचूक उपाय

Brain Power के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाई दवाएँ: मेमोरी, फोकस और दिमाग तेज करने के अचूक उपाय

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, ऑफिस का अत्यधिक तनाव, पढ़ाई का भारी दबाव और डिजिटल स्क्रीन की लत ने हमारे मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है। अक्सर लोग यह शिकायत करते हैं कि वे छोटी-छोटी बातें भूलने लगे हैं, किसी जरूरी काम पर पूरा ध्यान नहीं लगा पाते या दोपहर होते-होते मानसिक थकान और ब्रेन फॉग महसूस करने लगते हैं। जब याददाश्त कमजोर होने लगती है और एकाग्रता में कमी आने लगती है, तब हर किसी के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि क्या कोई ऐसी दवा या सप्लीमेंट है जो दिमाग की कार्यक्षमता को फिर से तेज कर सके?

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका sehat sarthi के ब्लॉग पर। आज के इस विस्तृत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तैयार किए गए लेख में हम बात करेंगे Brain Power के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाई दवाएँ, मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को सक्रिय करने वाले न्यूरोप्रोटेक्टिव तत्व, आयुर्वेदिक बूटियां और आधुनिक मेडिकल साइंस में इस्तेमाल होने वाले सुरक्षित विकल्पों के बारे में। हमारा उद्देश्य आपको पूरी तरह से निष्पक्ष, तथ्यात्मक और व्यावहारिक जानकारी देना है ताकि आप अपने मस्तिष्क स्वास्थ्य के बारे में सही और जिम्मेदार निर्णय ले सकें।

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, हमारे मस्तिष्क को सही ढंग से काम करने के लिए निरंतर ऑक्सीजन, ग्लूकोज और न्यूरोट्रांसमीटर्स (जैसे एसिटाइलकोलीन, डोपामाइन और सेरोटोनिन) के उचित संतुलन की आवश्यकता होती है। जब इन रसायनों का संतुलन बिगड़ता है या दिमाग की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं में रक्त संचार धीमा पड़ता है, तो याददाश्त और फोकस प्रभावित होने लगता है। यदि आप भी अपनी दैनिक उत्पादकता और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो आइए समझते हैं कि डॉक्टर किन परिस्थितियों में कौन-सी दवाओं और पोषक तत्वों की सलाह देते हैं।

ब्रेन पावर और मेमोरी कम होने के मुख्य कारण

किसी भी दवा या सप्लीमेंट की तरफ कदम बढ़ाने से पहले यह समझना आवश्यक है कि दिमाग सुस्त क्यों पड़ रहा है। कई बार समस्या किसी गंभीर बीमारी की नहीं, बल्कि जीवनशैली की साधारण गलतियों की होती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार मानसिक कमजोरी के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  • पोषक तत्वों की कमी: शरीर में विटामिन B12, विटामिन D3, आयरन और आवश्यक फैटी एसिड्स की कमी से न्यूरॉन्स के बीच संदेश भेजने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
  • नींद का अभाव: गहरी नींद के दौरान मस्तिष्क अपने हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और यादों को स्थायी रूप में संजोता है। 7-8 घंटे की निर्बाध नींद न मिलने पर मस्तिष्क कोशिकाओं की मरम्मत नहीं हो पाती।
  • क्रॉनिक स्ट्रेस और कोर्टिसोल: लगातार तनाव में रहने से कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस को नुकसान पहुंचाता है।
  • डिहाइड्रेशन: मस्तिष्क का लगभग 75% हिस्सा पानी से बना है। शरीर में पानी की हल्की सी कमी भी सिरदर्द, ध्यान भटकने और ब्रेन फॉग का कारण बन सकती है।
  • खराब रक्त संचार: सेरेब्रल सर्कुलेशन कमजोर होने से मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।

यदि आप अपने स्वास्थ्य को समग्र रूप से सुधारना चाहते हैं और क्लिनिकल समझ को गहरा करना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट के नर्सिंग नोट्स और क्लिनिकल गाइड सेक्शन में जाकर मानव तंत्रिका तंत्र से जुड़ी जरूरी जानकारियां भी विस्तार से पढ़ सकते हैं।

Brain Power के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाई जाने वाली मुख्य एलोपैथिक दवाएँ

एलोपैथी में मस्तिष्क की सक्रियता बढ़ाने, न्यूरोडीजेनेरेशन को रोकने और रक्त संचार को सुधारने के लिए विशिष्ट चिकित्सीय स्थितियों में कुछ विशेष मॉलिक्यूल्स का उपयोग किया जाता है। इन दवाओं को कभी भी बिना पर्ची के नहीं लेना चाहिए; ये केवल न्यूरोलॉजिस्ट या फिजिशियन की निगरानी में ही ली जाती हैं। दवाओं के सुरक्षित उपयोग के नियमों को समझने के लिए आप हमारे पोर्टल पर एलोपैथी दवाओं के नियम और वर्गीकरण को पढ़ सकते हैं।

1. सिटिकोलिन (Citicoline)

सिटिकोलिन मस्तिष्क के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण यौगिक है। यह शरीर में जाकर कोलीन और साइटिडीन में टूटता है, जो फॉस्फेटिडिलकोलीन के निर्माण में मदद करते हैं। यह मस्तिष्क की कोशिका झिल्लियों की मरम्मत करता है और एसिटाइलकोलीन नामक न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को बढ़ाता है, जो याददाश्त और सीखने की क्षमता के लिए जिम्मेदार है। डॉक्टर अक्सर स्ट्रोक के बाद रिकवरी, उम्र से संबंधित याददाश्त की कमी और गंभीर ब्रेन फॉग की स्थिति में सिटिकोलिन टैबलेट या सिरप लिखते हैं।

2. पिरासिटाम (Piracetam)

पिरासिटाम नूट्रोपिक वर्ग की सबसे पुरानी और व्यापक रूप से अध्ययन की गई दवाओं में से एक है। यह दवा मस्तिष्क के दोनों गोलार्धों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को बेहतर बनाती है और सेरेब्रल कॉर्टेक्स में ऑक्सीजन तथा ग्लूकोज के उपयोग को बढ़ाती है। मायोक्लोनस, चक्कर आने और संज्ञानात्मक गिरावट के मामलों में डॉक्टर इसकी सलाह देते हैं।

3. जिन्कगो बिलोबा एक्सट्रैक्ट (Ginkgo Biloba)

जिन्कगो बिलोबा एक प्राकृतिक वनस्पति से प्राप्त मानकीकृत अर्क है, जिसे क्लिनिकल प्रैक्टिस में एक प्रभावी वैसोडाइलेटर माना जाता है। यह मस्तिष्क की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करता है, जिससे मस्तिष्क तक रक्त, ग्लूकोज और ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ जाती है। अल्जाइमर रोग के शुरुआती लक्षणों, टिनिटस और बुजुर्गों में याददाश्त की कमी को नियंत्रित करने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट इसका उपयोग करते हैं।

4. डोनेपेज़िल और रिवास्टिग्माइन (Donepezil & Rivastigmine)

ये दवाएं कोलिनेस्टरेज़ इनहिबिटर की श्रेणी में आती हैं। इनका उपयोग गंभीर डिमेंशिया और अल्जाइमर रोग के उपचार में किया जाता है। ये दवाएं मस्तिष्क में एसिटाइलकोलीन को नष्ट करने वाले एंजाइम को रोकती हैं, जिससे तंत्रिकाओं के बीच सिग्नलिंग बनी रहती है। यह अत्यंत शक्तिशाली दवाएं हैं और इनके उपयोग के लिए नियमित डॉक्टर फॉलो-अप अनिवार्य होता है।

मस्तिष्क के लिए आवश्यक विटामिन और मिनरल्स सप्लीमेंट्स

कई बार बिना किसी भारी दवा के, केवल शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करके ही याददाश्त और मानसिक सतर्कता को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। आधुनिक मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार निम्नलिखित सप्लीमेंट्स दिमाग के लिए बेहद कारगर साबित होते हैं:

पोषक तत्व / सप्लीमेंट मस्तिष्क के लिए मुख्य कार्य दैनिक प्राकृतिक स्रोत
विटामिन B12 (मिथाइलकोबालामिन) नर्वस सिस्टम की माइलिन शीथ की सुरक्षा और नसों की मजबूती दूध, दही, पनीर, अंडा, फोर्टिफाइड अनाज
ओमेगा-3 फैटी एसिड (DHA & EPA) ब्रेन सेल्स की संरचनात्मक बनावट और सूजन कम करना अखरोट, अलसी के बीज, चिया सीड्स, फैटी फिश
विटामिन D3 मूड रेगुलेशन, न्यूरोप्रोटेक्शन और कॉग्निटिव हेल्थ सुबह की धूप, मशरूम, सप्लीमेंट्स
मैग्नीशियम एल-थ्रियोनेट ब्लड-ब्रेन बैरियर को पार कर न्यूरोनल प्लास्टिसिटी बढ़ाना कद्दू के बीज, पालक, डार्क चॉकलेट, बादाम

यदि आप लंबे समय से थकान, सुस्ती और चिड़चिड़ापन महसूस कर रहे हैं, तो अपने नजदीकी पैथोलॉजी लैब में जाकर सीरम विटामिन B12 और विटामिन D3 का टेस्ट जरूर करवाएं। पोषण की कमी दूर होते ही फोकस में सुधार देखने को मिलता है।

आयुर्वेद में दिमाग तेज करने वाली दिव्य मेध्य रसायन बूटियां

प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में मस्तिष्क की कार्यक्षमता, धारणा शक्ति और स्मृति को बढ़ाने के लिए “मेध्य रसायन” का विस्तृत वर्णन मिलता है। आज दुनिया भर के आधुनिक न्यूरोसाइंटिस्ट भी इन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों पर गहन शोध कर रहे हैं। इनके वैज्ञानिक शोध पत्रों को आप विश्व प्रसिद्ध चिकित्सा अनुसंधान संस्थान National Center for Biotechnology Information (NCBI) की आधिकारिक लाइब्रेरी पर भी देख सकते हैं। आयुर्वेद के बुनियादी सिद्धांतों और अन्य जड़ी-बूटियों के बारे में अधिक जानने के लिए हमारे विशेष लेख आयुर्वेदिक उपचार और औषधियां पर जरूर जाएं।

1. ब्राह्मी (Bacopa Monnieri)

ब्राह्मी को मस्तिष्क का सबसे शक्तिशाली टॉनिक माना जाता है। इसमें मौजूद ‘बैकोसाइड्स’ नामक सक्रिय घटक क्षतिग्रस्त न्यूरॉन्स की मरम्मत करते हैं और मस्तिष्क में नए सिनैप्स के निर्माण को बढ़ावा देते हैं। यह न केवल याददाश्त को पुख्ता करती है बल्कि परीक्षा या इंटरव्यू के दौरान होने वाली घबराहट और एंग्जायटी को भी कम करती है।

2. शंखपुष्पी (Convolvulus Pluricaulis)

शंखपुष्पी मानसिक तनाव को शांत करने और अनिद्रा की समस्या को दूर करने के लिए प्रसिद्ध है। यह दिमाग की अत्यधिक उत्तेजना को शांत कर एकाग्रता को गहरा करती है। छात्रों के लिए शंखपुष्पी सिरप या चूर्ण का सेवन प्राचीन काल से अत्यंत लाभकारी माना गया है।

3. अश्वगंधा (Withania Somnifera)

अश्वगंधा एक शक्तिशाली एडाप्टोजेन है। यह शरीर में तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को नियंत्रित करता है। जब तनाव घटता है, तो मस्तिष्क की स्वाभाविक विश्लेषण क्षमता और तार्किक शक्ति खुद-ब-खुद बढ़ जाती है।

4. मंडूकपर्णी (Centella Asiatica / Gotu Kola)

मंडूकपर्णी मस्तिष्क की सूक्ष्म केशिकाओं में रक्त संचार को सुगम बनाती है और उम्र बढ़ने के साथ होने वाली याददाश्त की कमजोरी से बचाती है। यह त्वचा और तंत्रिका तंत्र दोनों को नया जीवन प्रदान करती है।

घरेलू नुस्खे और आहार: मस्तिष्क को प्राकृतिक रूप से तेज कैसे करें?

दवाओं और सप्लीमेंट्स के साथ-साथ यदि खान-पान में कुछ खास चीजों को शामिल किया जाए, तो दवाओं का असर दोगुना हो जाता है। हमारी रसोई में ही ऐसे कई सुपरफूड्स मौजूद हैं जो न्यूरोप्रोटेक्टिव गुणों से भरपूर हैं:

  • भीगे हुए बादाम और अखरोट: रात को 5 बादाम और 2 अखरोट पानी में भिगो दें। सुबह छिलका उतारकर खूब चबा-चबाकर खाएं। बादाम में विटामिन ई और अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होते हैं जो दिमागी कोशिकाओं की उम्र बढ़ाते हैं।
  • गाय का शुद्ध देसी घी: आयुर्वेद के अनुसार गाय का घी मेध्य होता है। रोज रात को एक गिलास गुनगुने दूध में आधा चम्मच गाय का घी मिलाकर पीने से तंत्रिका तंत्र शांत होता है और याददाश्त तेज होती है।
  • हल्दी वाला दूध (कर्क्यूमिन): हल्दी में पाया जाने वाला कर्क्यूमिन एक शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी घटक है, जो मस्तिष्क से हानिकारक प्लाक को साफ करने में मदद करता है।
  • कद्दू के बीज: इनमें जिंक, मैग्नीशियम, कॉपर और आयरन की भरपूर मात्रा होती है, जो नर्व सिग्नलिंग और मेमोरी रिकॉल को मजबूत करते हैं।

स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े ऐसे ही सरल पारंपरिक उपायों के लिए आप हमारे संग्रह घरेलू नुस्खे और दादी-नानी के उपाय को पढ़ सकते हैं। इसके अलावा यदि आप तनाव या नर्वस कमजोरी के लिए हानिरहित वैकल्पिक चिकित्सा तलाश रहे हैं, तो होम्योपैथी के मूल सिद्धांत और दवाएं लेख में कई उपयोगी जानकारियां दी गई हैं।

दवाओं के साथ लाइफस्टाइल में करें ये 5 अनिवार्य बदलाव

कोई भी दवा जादू की छड़ी नहीं होती। यदि आपकी दैनिक दिनचर्या असंतुलित है, तो दुनिया की कोई भी नूट्रोपिक दवा आपको पूर्ण लाभ नहीं दे पाएगी। मस्तिष्क स्वास्थ्य को शीर्ष स्तर पर ले जाने के लिए इन 5 वैज्ञानिक आदतों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं:

  1. नियमित एरोबिक व्यायाम: रोजाना 30 मिनट तेज चलना, दौड़ना, तैरना या साइकिल चलाना मस्तिष्क में बीडीएनएफ (Brain-Derived Neurotrophic Factor) के स्तर को बढ़ाता है। बीडीएनएफ नए मस्तिष्क न्यूरॉन्स के जन्म और विकास के लिए जिम्मेदार होता है। अधिक स्वास्थ्य गाइडलाइंस के लिए World Health Organization (WHO) की फिजिकल एक्टिविटी रिपोर्ट देख सकते हैं।
  2. गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद: रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक की नींद को प्राथमिकता दें। सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन बंद कर दें।
  3. माइंडफुलनेस और प्राणायाम: अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को संतुलित करते हैं और तुरंत मानसिक शांति प्रदान करते हैं। रोजाना 10 मिनट का ध्यान आपके ध्यान केंद्रित करने की अवधि को बढ़ाता है।
  4. मस्तिष्क के लिए पहेलियां और नई सीख: अपने दिमाग को हमेशा सक्रिय रखें। शतरंज खेलें, सुडोकू हल करें, कोई नई भाषा सीखें या कोई वाद्य यंत्र बजाना शुरू करें। इससे दिमाग में नए न्यूरल पाथवे बनते हैं।
  5. भरपूर पानी पिएं: दिनभर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी जरूर पिएं ताकि मस्तिष्क की कोशिकाओं में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहे।

Brain Booster दवाएं लेते समय बरती जाने वाली सावधानियां

बाजार में और इंटरनेट पर कई असुरक्षित और अप्रमाणित दवाएं बेची जा रही हैं। बिना सोचे-समझे किसी भी विज्ञापन के बहकावे में आकर दवाएं खरीदने से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं। निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • बिना डॉक्टर के पर्चे के कभी भी शेड्यूल H या नियंत्रित श्रेणी की नूट्रोपिक दवाओं का सेवन न करें।
  • कैफीन युक्त सप्लीमेंट्स का अत्यधिक सेवन न करें, इससे दिल की धड़कन तेज होना, एंग्जायटी और अनिद्रा की शिकायत हो सकती है।
  • यदि आप पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या मिर्गी की दवा ले रहे हैं, तो कोई भी हर्बल या एलोपैथिक सप्लीमेंट शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर को अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री जरूर बताएं।
  • हमेशा एफडीए (FDA) या एफएसएसएआई (FSSAI) द्वारा प्रमाणित और विश्वसनीय ब्रांड्स के सप्लीमेंट्स ही चुनें। अपनी दिनचर्या में संतुलित आहार शामिल करने के साथ-साथ आप हमारे पोर्टल पर उपलब्ध संतुलित आहार और न्यूट्रिशन प्लान की सहायता से अपने मस्तिष्क के लिए सही फूड चार्ट भी तैयार कर सकते हैं।

निष्कर्ष

मस्तिष्क मानव शरीर का सबसे जटिल, संवेदनशील और अनमोल अंग है। Brain Power के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाई दवाएँ जैसे सिटिकोलिन, पिरासिटाम, जिन्कगो बिलोबा या आयुर्वेदिक मेध्य रसायन जैसे ब्राह्मी और शंखपुष्पी निश्चित रूप से तंत्रिका तंत्र को पोषण और संबल प्रदान करते हैं। परंतु, इनके साथ-साथ संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक व्यायाम और तनावमुक्त जीवनशैली का होना अनिवार्य है। यदि आप लगातार अत्यधिक भूलने की बीमारी, ध्यान केंद्रित करने में गंभीर असमर्थता या व्यवहार में बदलाव महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत किसी योग्य न्यूरोलॉजिस्ट या फिजिशियन से मिलकर अपनी जांच करवाएं। सजग रहें, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और अपने दिमाग को हमेशा तरोताजा रखें।

Disclaimer: सेहत सारथी पर दी गई जानकारी केवल सामान्य शिक्षा के लिए है और इसे चिकित्सीय सलाह न समझें। किसी भी उपचार या दवा के उपयोग से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। इस पोस्ट में एफिलिएट लिंक हो सकते हैं, जिनसे खरीदारी करने पर हमें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के छोटा कमीशन मिल सकता है।

FAQ’s

 

FAQ 1: दिमाग और याददाश्त तेज करने के लिए डॉक्टर सबसे ज्यादा कौन-सी दवा लिखते हैं?

उत्तर: न्यूरोलॉजिस्ट और फिजिशियन मुख्य रूप से मस्तिष्क में रक्त संचार और न्यूरोट्रांसमीटर्स को बेहतर करने के लिए सिटिकोलिन (Citicoline), पिरासिटाम (Piracetam) और मानकीकृत जिन्कगो बिलोबा (Ginkgo Biloba) जैसी दवाएं लिखते हैं। इसके अलावा, शरीर में नसों की मजबूती के लिए विटामिन B12 (मिथाइलकोबालामिन) और ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी पूरी करने की सलाह दी जाती है। इन दवाओं को कभी भी बिना डॉक्टर के परामर्श के नहीं लेना चाहिए।

FAQ 2: क्या ब्रेन बूस्टर सप्लीमेंट्स लेने के कोई साइड इफेक्ट्स भी होते हैं?

उत्तर: डॉक्टर की सलाह के बिना या जरूरत से ज्यादा मात्रा में नूट्रोपिक सप्लीमेंट्स लेने से सिरदर्द, पेट में गड़बड़ी, दिल की धड़कन बढ़ना, घबराहट और अनिद्रा (नींद न आना) जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषकर कैफीन युक्त या बिना लैब-प्रमाणित स्मार्ट पिल्स से बचना चाहिए और हमेशा विश्वसनीय ब्रांड्स के सुरक्षित उत्पाद ही डॉक्टर से पूछकर लेने चाहिए।

​FAQ 3: आयुर्वेद में दिमाग और फोकस बढ़ाने के लिए सबसे असरदार जड़ी-बूटी कौन-सी है?

उत्तर: आयुर्वेद में ‘ब्राह्मी’ (Bacopa Monnieri) और ‘शंखपुष्पी’ को मस्तिष्क के लिए सबसे उत्तम मेध्य रसायन माना गया है। ब्राह्मी मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) की मरम्मत करती है और नई चीजें सीखने की क्षमता बढ़ाती है, जबकि शंखपुष्पी मानसिक तनाव को शांत कर ध्यान केंद्रित करने में मदद करती है।

FAQ 4: क्या घरेलू नुस्खों और सही डाइट से भी दिमाग तेज किया जा सकता है?

उत्तर: बिल्कुल। रात को पानी में भिगोए हुए बादाम और अखरोट खाने से मस्तिष्क को प्रचुर मात्रा में विटामिन ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड मिलता है। इसके साथ ही गाय का शुद्ध घी, कद्दू के बीज, हल्दी वाला दूध और दिनभर में 2.5 से 3 लीटर पानी का सेवन मस्तिष्क की कार्यक्षमता और याददाश्त को प्राकृतिक रूप से दुरुस्त रखता है।

FAQ 5: ब्रेन पावर बढ़ाने वाली दवाओं का असर दिखने में कितना समय लगता है?

उत्तर: कोई भी दवा या न्यूरोलॉजिकल सप्लीमेंट रातों-रात असर नहीं दिखाता। आमतौर पर मस्तिष्क की कोशिकाओं में पोषण का स्तर सुधरने और याददाश्त या फोकस में स्पष्ट बदलाव महसूस होने में 4 से 8 हफ्ते (1 से 2 महीने) का समय लगता है। इसके साथ 7-8 घंटे की गहरी नींद और नियमित व्यायाम जारी रखना जरूरी होता है।